Steel Authority of India Limited के बोकारो स्टील प्लांट में कार्यबल में 40% कटौती के प्रस्तावित फैसले के खिलाफ कर्मचारियों और संविदाकर्मियों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। झारखंड स्थित बोकारो स्टील प्लांट के CEZ गेट पर हजारों की संख्या में श्रमिकों ने एकजुट होकर प्रबंधन के निर्णय के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया।
श्रमिक संगठनों का आरोप है कि इस फैसले से कर्मचारियों और संविदा श्रमिकों के बीच भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है।
ट्रेड यूनियन से बिना चर्चा निर्णय लेने पर नाराजगी
भारतीय मजदूर संघ से जुड़े इस्पात महासंघ (BMS) ने सेल प्रबंधन के फैसले को “कठोर और अदूरदर्शी कदम” बताया है। संघ का कहना है कि मजदूरों से जुड़े नीतिगत बदलावों पर ट्रेड यूनियनों से चर्चा किए बिना निर्णय लेना उचित नहीं है।

यूनियन की प्रमुख आपत्तियां
- कार्यबल में 40% कटौती का प्रस्ताव
- ट्रेड यूनियन से बिना चर्चा निर्णय
- श्रमिकों में असुरक्षा और भय का माहौल
- सुरक्षा मानकों पर असर की आशंका
- लाभार्जन को प्राथमिकता देने का आरोप
संघ ने इस मुद्दे को लेकर इस्पात मंत्रालय और सेल प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर कर्मचारियों की नाराजगी से अवगत कराया है। हालांकि, अब तक प्रबंधन की ओर से कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला है।
कई यूनिट्स में हो रहे हैं विरोध प्रदर्शन
इस्पात महासंघ (BMS) की कार्यसमिति ने निर्णय लिया है कि 30 मई तक सेल की विभिन्न इकाइयों में प्रदर्शन कर विरोध जताया जाएगा।
अब तक कहां-कहां हुए प्रदर्शन
- 12 मई – बर्नपुर
- 13 मई – अलॉय स्टील प्लांट
- 18 मई – दुर्गापुर स्टील प्लांट
- 27 मई – बोकारो स्टील प्लांट
इसके अलावा भिलाई, विशाखापट्टनम, सेलम और लौह अयस्क खदान क्षेत्रों में भी चरणबद्ध तरीके से प्रदर्शन किए जाएंगे।
संविदा श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा की मांग
भारतीय मजदूर संघ ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों में संविदा श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करना प्रबंधन की जिम्मेदारी है। यूनियन ने प्रबंधन से मांग की है कि कार्यबल कटौती के लक्ष्य को तत्काल स्थगित किया जाए।
यूनियन की प्रमुख मांगें
- कार्यबल कटौती योजना पर रोक
- संविदा श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा
- ट्रेड यूनियनों से संवाद
- सुरक्षा मानकों को प्राथमिकता
- लंबित श्रमिक मुद्दों का समाधान
सुरक्षा और उत्पादन पर असर की आशंका
श्रमिक संगठनों का कहना है कि बड़ी संख्या में कर्मचारियों की कटौती से उत्पादन प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था दोनों प्रभावित हो सकते हैं। उनका आरोप है कि प्रबंधन लागत घटाने और लाभ बढ़ाने के लिए श्रमिक हितों की अनदेखी कर रहा है।
