40 वर्ष के BOOT मॉडल पर विकसित होगी परियोजना, NHPC की विकास पाइपलाइन को मिला बड़ा बल
NHPC Limited ने अरुणाचल प्रदेश सरकार के साथ 3097 मेगावाट क्षमता वाली एटालिन हाइड्रो इलेक्ट्रिक परियोजना (Etalin HEP) के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoA) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह परियोजना अरुणाचल प्रदेश के दिबांग बेसिन में स्थित है और देश की सबसे बड़ी प्रस्तावित जलविद्युत परियोजनाओं में से एक मानी जाती है।
इस समझौते के साथ NHPC की नवीकरणीय ऊर्जा और जलविद्युत परियोजनाओं की विकास पाइपलाइन में एक बड़ी क्षमता जुड़ गई है, जिससे कंपनी की दीर्घकालिक विकास रणनीति को मजबूती मिलेगी।
दिबांग बेसिन में विकसित होगी परियोजना
एटालिन हाइड्रो इलेक्ट्रिक परियोजना अरुणाचल प्रदेश के दिबांग बेसिन में स्थित द्री (Dri) और टैंगोन (Tangon) नदियों पर विकसित की जाएगी।
यह एक रन-ऑफ-द-रिवर (Run-of-the-River) परियोजना होगी, अर्थात इसका संचालन मुख्य रूप से नदी के प्राकृतिक जल प्रवाह पर आधारित होगा। इस प्रकार की परियोजनाओं में बड़े जलाशयों की आवश्यकता अपेक्षाकृत कम होती है और इन्हें पर्यावरणीय दृष्टि से अधिक अनुकूल माना जाता है।
BOOT मॉडल पर 40 वर्षों तक संचालन
परियोजना का विकास Build, Own, Operate and Transfer (BOOT) मॉडल के तहत किया जाएगा।
इस मॉडल के अनुसार:
- NHPC परियोजना का निर्माण करेगी।
- परियोजना का स्वामित्व और संचालन अपने पास रखेगी।
- वाणिज्यिक संचालन तिथि (COD) से 40 वर्षों तक इसका संचालन करेगी।
- निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद परियोजना का हस्तांतरण किया जाएगा।
यह व्यवस्था NHPC को लंबी अवधि तक स्थिर राजस्व अर्जित करने का अवसर प्रदान करेगी।
NHPC की जिम्मेदारियां बढ़ीं
समझौते के तहत NHPC परियोजना के संपूर्ण विकास चक्र की जिम्मेदारी संभालेगी, जिसमें शामिल हैं:
- विस्तृत सर्वेक्षण एवं साइट जांच
- विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करना
- वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था
- निर्माण एवं कमीशनिंग
- संचालन एवं रखरखाव (O&M)
परियोजना का विकास अरुणाचल प्रदेश हाइड्रो पावर नीति, 2008 के प्रावधानों के अनुरूप किया जाएगा।
ऊर्जा सुरक्षा और हरित ऊर्जा को मिलेगा बढ़ावा
भारत सरकार जलविद्युत क्षमता विस्तार को ऊर्जा संक्रमण और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती है। एटालिन परियोजना के विकसित होने से:
- पूर्वोत्तर क्षेत्र में ऊर्जा अवसंरचना मजबूत होगी
- राष्ट्रीय ग्रिड को अतिरिक्त स्वच्छ बिजली उपलब्ध होगी
- क्षेत्रीय आर्थिक विकास को गति मिलेगी
- रोजगार और बुनियादी ढांचा विकास के अवसर बढ़ेंगे
विशेषज्ञों का मानना है कि 3097 मेगावाट क्षमता वाली यह परियोजना देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
निवेशकों को किन बातों पर रखनी चाहिए नजर?
हालांकि परियोजना NHPC के लिए दीर्घकालिक अवसर प्रदान करती है, लेकिन बड़े जलविद्युत प्रोजेक्ट्स के साथ कुछ महत्वपूर्ण चुनौतियां भी जुड़ी होती हैं:
प्रमुख जोखिम
- पर्यावरण एवं वन स्वीकृतियां
- भूमि अधिग्रहण संबंधी प्रक्रियाएं
- परियोजना वित्तपोषण
- निर्माण लागत में वृद्धि
- परियोजना क्रियान्वयन में संभावित देरी
इन कारकों का परियोजना की समयसीमा और लागत पर प्रभाव पड़ सकता है।
बाजार और निवेशकों की नजर अब निम्नलिखित बिंदुओं पर रहेगी:
- DPR तैयार होने की प्रगति
- पर्यावरण एवं वैधानिक मंजूरियां
- वित्तीय समापन (Financial Closure)
- निर्माण कार्य शुरू होने की समयसीमा
- परियोजना की अनुमानित लागत
इन चरणों में प्रगति परियोजना के भविष्य और NHPC की दीर्घकालिक आय संभावनाओं का महत्वपूर्ण संकेतक होगी।
