GRSE को मिला ‘राजभाषा कीर्ति पुरस्कार’, हिंदी के उत्कृष्ट कार्यान्वयन के लिए हुआ सम्मान

मुंबई: रक्षा मंत्रालय के अधीन नवरत्न रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) को वर्ष 2025-26 के लिए प्रतिष्ठित ‘राजभाषा कीर्ति पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की श्रेणी में राजभाषा हिंदी के उत्कृष्ट कार्यान्वयन के लिए दिया गया है।

यह सम्मान गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग की ओर से प्रदान किया गया। GRSE के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक कमोडोर पीआर हरि (सेवानिवृत्त) ने 14 सितंबर 2026 को नवी मुंबई में आयोजित हिंदी दिवस समारोह और छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन के दौरान केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से यह पुरस्कार प्राप्त किया।

हिंदी के प्रभावी इस्तेमाल के लिए मिला सम्मान

राजभाषा कीर्ति पुरस्कार GRSE की ओर से हिंदी के प्रचार, प्रभावी उपयोग और व्यापक प्रसार के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों की मान्यता है। कंपनी ने अपने आधिकारिक कामकाज में हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ राजभाषा के प्रभावी कार्यान्वयन पर लगातार जोर दिया है।

GRSE के अनुसार, यह सम्मान संस्थान की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है जिसके तहत वह राजभाषा हिंदी के विकास और उसके व्यापक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहा है।

हिंदी दिवस समारोह में कई गणमान्य लोग रहे मौजूद

नवी मुंबई में आयोजित कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

कार्यक्रम में ठाणे/नवी मुंबई से लोकसभा सांसद नरेश गणपत म्हस्के, राजभाषा विभाग की सचिव अंशुली आर्या, GRSE के निदेशक (कॉरपोरेट प्लानिंग एंड पर्सनेल) कैप्टन पी. सुनीलकुमार (सेवानिवृत्त) और वरिष्ठ प्रबंधक (राजभाषा) मनीष कुमार सिंह भी शामिल हुए। देशभर से हिंदी के विद्वान और अन्य विशिष्ट अतिथि भी समारोह में उपस्थित रहे।

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1884 से शुरू हुआ GRSE का सफर

गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड का इतिहास वर्ष 1884 से जुड़ा है। कंपनी ने शुरुआत रिवर स्टीम नेविगेशन कंपनी के जहाजों की मरम्मत करने वाली एक छोटी वर्कशॉप के रूप में की थी। वर्ष 1960 में भारत सरकार ने इसका अधिग्रहण किया।

GRSE को स्वतंत्र भारत में भारतीय नौसेना के लिए युद्धपोत बनाने वाले शुरुआती शिपयार्डों में विशेष स्थान हासिल है। वर्ष 1961 में कंपनी ने भारतीय नौसेना के लिए सीवर्ड डिफेंस बोट (SDB) INS Ajay का निर्माण किया था।

800 से ज्यादा प्लेटफॉर्म का निर्माण

GRSE के मुताबिक, कंपनी अब तक 800 से अधिक प्लेटफॉर्म का निर्माण कर चुकी है, जिसमें भारतीय नौसेना, भारतीय तटरक्षक बल और मित्र देशों के लिए बनाए गए 118 युद्धपोत शामिल हैं। कंपनी के अनुसार किसी भारतीय शिपयार्ड द्वारा निर्मित और डिलीवर किए गए युद्धपोतों की संख्या के मामले में यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

GRSE ने भारत के अलावा मॉरीशस के लिए पहला भारतीय निर्यात युद्धपोत CGS Barracuda, सेशेल्स के लिए फास्ट पेट्रोल वेसल SCG PS Zoroaster और गुयाना के लिए समुद्री कार्गो एवं पैसेंजर फेरी MV Ma Lisha का भी निर्माण किया है।

शिपबिल्डिंग के साथ इंजीनियरिंग कारोबार में भी विस्तार

जहाज निर्माण और जहाज मरम्मत के अलावा GRSE ने इंजीनियरिंग क्षेत्र में भी अपनी गतिविधियों का विस्तार किया है। कंपनी प्री-फैब्रिकेटेड स्टील ब्रिज, डेक मशीनरी, मरीन डीजल इंजन की असेंबली, टेस्टिंग और ओवरहॉलिंग तथा 30mm Naval Surface Guns के निर्माण जैसे कार्यों में भी सक्रिय है।

कंपनी के पास चार अलग-अलग शिपयार्ड हैं और आधुनिक बुनियादी ढांचे के जरिए एक समय में 28 जहाजों के समानांतर निर्माण की क्षमता है। GRSE ने अपनी इन-हाउस डिजाइन क्षमताओं को मजबूत करने के लिए आधुनिक सॉफ्टवेयर और नेक्स्ट जनरेशन VR लैब जैसी तकनीकी सुविधाएं भी विकसित की हैं।

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राष्ट्र निर्माण में योगदान जारी रखने की प्रतिबद्धता

GRSE ने कहा कि ‘राजभाषा कीर्ति पुरस्कार’ कंपनी के लिए हिंदी के प्रचार-प्रसार और प्रभावी इस्तेमाल के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है। नवरत्न रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम के रूप में GRSE ने राजभाषा हिंदी को बढ़ावा देने के साथ देश के रक्षा और जहाज निर्माण क्षेत्र में योगदान जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है।