नई दिल्ली, 25 सितंबर 2026: देश के इस्पात और कोयला क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण पहल के तहत स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) और भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) ने पश्चिम बंगाल में कोकिंग कोयला संसाधनों के संयुक्त विकास और संचालन के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस समझौते के तहत SAIL के इंडिकट्टा रामनगोर कोयला ब्लॉक और BCCL के ईस्ट ऑफ दामागोरिया (कल्याणेश्वरी) कोयला ब्लॉक का संयुक्त रूप से विकास और संचालन प्रस्तावित है। दोनों सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के बीच यह सहयोग घरेलू कोकिंग कोयला उत्पादन बढ़ाने और इस्पात उद्योग के लिए कच्चे माल की उपलब्धता मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
4 मिलियन टन सालाना होगी संयुक्त क्षमता
दोनों कोयला ब्लॉकों की संयुक्त पीक रेटेड क्षमता (PRC) 4.0 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) है। परियोजना के पहले चरण में लगभग 79 मिलियन टन निष्कर्षणीय कोयला भंडार होने का अनुमान है।
प्रस्तावित एकीकृत खनन व्यवस्था का उद्देश्य दोनों ब्लॉकों में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर और समन्वित उपयोग करना है। इसके तहत खनन और ओवरबर्डन प्रबंधन को एकीकृत तरीके से संचालित किया जाएगा।
एकीकृत माइनिंग मॉडल से संसाधनों का बेहतर उपयोग
MoU के तहत फेज-1 में कल्याणेश्वरी ब्लॉक में खनन और रामनगोर ब्लॉक में ओवरबर्डन डंपिंग की व्यवस्था प्रस्तावित है। वहीं फेज-2 में इस व्यवस्था को उलट दिया जाएगा। यानी दोनों ब्लॉकों के बीच खनन और ओवरबर्डन प्रबंधन का समन्वित उपयोग किया जाएगा।
इस मॉडल का उद्देश्य उपलब्ध भूमि और कोयला संसाधनों का अधिक प्रभावी इस्तेमाल करते हुए खनन गतिविधियों को व्यवस्थित करना है।
घरेलू कोकिंग कोयला उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
भारत का इस्पात उद्योग कोकिंग कोयले की उपलब्धता के लिए घरेलू और आयातित दोनों स्रोतों पर निर्भर रहता है। ऐसे में घरेलू कोकिंग कोयला उत्पादन में बढ़ोतरी से स्टील उत्पादन के लिए जरूरी कच्चे माल की उपलब्धता को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
SAIL और BCCL के बीच यह सहयोग आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। घरेलू संसाधनों के एकीकृत इस्तेमाल से कोकिंग कोयले के उत्पादन को बढ़ाने और भारतीय इस्पात उद्योग की कच्चे माल संबंधी जरूरतों को पूरा करने की कोशिश की जा रही है।
SAIL और BCCL के लिए क्यों महत्वपूर्ण है MoU?
इस समझौते से दोनों कंपनियों को उपलब्ध कोयला संसाधनों के संयुक्त और बेहतर उपयोग का अवसर मिलेगा। साथ ही, एकीकृत खनन व्यवस्था के जरिए उत्पादन और ओवरबर्डन प्रबंधन को समन्वित करने की योजना है।
आने वाले समय में परियोजना के विकास, खनन गतिविधियों और उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी से जुड़े कदम इस समझौते की प्रगति तय करेंगे। घरेलू कोकिंग कोयला उत्पादन बढ़ने से इसका असर देश के इस्पात क्षेत्र की कच्चे माल की उपलब्धता पर भी पड़ सकता है।