श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में NHPC की छह जलविद्युत परियोजनाओं ने पिछले पांच वित्त वर्षों में केंद्र शासित प्रदेश को ₹5,537.32 करोड़ का प्रत्यक्ष वित्तीय लाभ पहुंचाया है। यह लाभ मुख्य रूप से पानी उपयोग शुल्क, मुफ्त बिजली और Local Area Development Fund (LADF) के मौद्रिक मूल्य के रूप में मिला है। यह जानकारी जम्मू-कश्मीर सरकार के पावर डेवलपमेंट डिपार्टमेंट ने विधानसभा में दिए जवाब में दी है।
NHPC परियोजनाओं से ₹3,582 करोड़ पानी उपयोग शुल्क
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच NHPC की छह परियोजनाओं से जम्मू-कश्मीर को ₹3,582.06 करोड़ पानी उपयोग शुल्क के रूप में प्राप्त हुए। इसके अलावा 12 प्रतिशत मुफ्त बिजली और 1 प्रतिशत LADF के मौद्रिक मूल्य से ₹1,955.26 करोड़ का लाभ मिला।
इस तरह दोनों मदों को मिलाकर कुल वित्तीय लाभ ₹5,537.32 करोड़ रहा। इन छह परियोजनाओं की संयुक्त स्थापित क्षमता 2,250 मेगावाट है।
सलाल का सबसे बड़ा योगदान
छह परियोजनाओं में 690 MW क्षमता वाली सलाल परियोजना पानी उपयोग शुल्क के मामले में सबसे बड़ा योगदान देने वाली परियोजना रही। इससे पांच वर्षों में ₹1,754.98 करोड़ पानी उपयोग शुल्क मिला। मुफ्त बिजली और LADF का मौद्रिक मूल्य ₹295.78 करोड़ रहा।
उरी-I, जिसकी क्षमता 480 MW है, ने ₹561.20 करोड़ पानी उपयोग शुल्क और ₹248.41 करोड़ मुफ्त बिजली एवं LADF के रूप में योगदान दिया।
दुलहस्ती की 390 MW क्षमता वाली परियोजना से ₹501.83 करोड़ पानी उपयोग शुल्क और ₹521.86 करोड़ मुफ्त बिजली एवं LADF का लाभ मिला। वहीं 120 MW की सेवा-II परियोजना से क्रमशः ₹36.08 करोड़ और ₹128.97 करोड़ का योगदान रहा।
इसी अवधि में उरी-II से ₹615.54 करोड़ पानी उपयोग शुल्क और ₹355.60 करोड़ मुफ्त बिजली एवं LADF का मौद्रिक लाभ मिला। किशनगंगा, जिसकी क्षमता 330 MW है, ने ₹112.43 करोड़ पानी उपयोग शुल्क और ₹404.64 करोड़ का योगदान किया।
बिजली और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा
सरकार के अनुसार, इन परियोजनाओं का लाभ केवल पानी उपयोग शुल्क और मुफ्त बिजली तक सीमित नहीं है। जलविद्युत परियोजनाओं के संचालन से स्थानीय स्तर पर रखरखाव, मरम्मत, परिवहन, सुरक्षा, हाउसकीपिंग, खरीद और अन्य सेवाओं के जरिए आर्थिक गतिविधियां भी पैदा होती हैं।
इन कार्यों में स्थानीय ठेकेदारों, कंपनियों और सेवा प्रदाताओं को अवसर मिलते हैं। साथ ही कुशल, अर्ध-कुशल और अकुशल श्रमिकों के लिए रोजगार के अवसर भी बनते हैं।
CSR के जरिए भी स्थानीय विकास
NHPC की कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) गतिविधियां भी परियोजना क्षेत्रों के विकास में योगदान देती हैं। सरकार के अनुसार, NHPC स्थानीय बुनियादी ढांचे के विकास के लिए लगभग ₹19 करोड़ सालाना CSR के तहत खर्च करता है।
दुलहस्ती पावर स्टेशन ने वित्त वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, कौशल विकास, ग्रामीण विकास और सामुदायिक बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्यों पर कुल ₹9.56 करोड़ खर्च किए।
जम्मू-कश्मीर में NHPC की भूमिका
वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में NHPC की छह प्रमुख परिचालित परियोजनाएं हैं—सलाल, उरी-I, दुलहस्ती, सेवा-II, उरी-II और किशनगंगा। इनकी कुल स्थापित क्षमता 2,250 MW है।
इसके अलावा NHPC को सावलकोट, उरी-I स्टेज-II और दुलहस्ती स्टेज-II जैसी नई परियोजनाओं के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी भी दी गई है। NHPC की आधिकारिक जानकारी के अनुसार उरी-I स्टेज-II की क्षमता 240 MW और दुलहस्ती स्टेज-II की क्षमता 260 MW है।
इस तरह जम्मू-कश्मीर के जलविद्युत क्षेत्र में NHPC की भूमिका आगे भी महत्वपूर्ण बनी रहने की संभावना है। मौजूदा परियोजनाओं से मिलने वाले वित्तीय लाभ के साथ नई परियोजनाएं क्षेत्र की बिजली उत्पादन क्षमता और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करेंगी।