कोयला मंत्रालय ने CCL मुख्यालय में राजभाषा हिंदी कार्यान्वयन की व्यापक समीक्षा की, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर हिंदी प्रयोग की सराहना

कोयला मंत्रालय के उच्चस्तरीय दल ने सीसीएल मुख्यालय में राजभाषा हिंदी कार्यान्वयन की समीक्षा की। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और सोशल मीडिया पर हिंदी के बढ़ते उपयोग की सराहना की गई।

Central Coalfields Limited के रांची स्थित मुख्यालय में कोयला मंत्रालय, भारत सरकार के उच्चस्तरीय निरीक्षण दल द्वारा राजभाषा हिंदी के कार्यान्वयन एवं प्रगामी प्रयोग की व्यापक समीक्षा की गई। यह निरीक्षण 13 मई 2026 को डॉ. माणिक चंद्र पंडित, आर्थिक सलाहकार एवं राजभाषा प्रभारी, कोयला मंत्रालय की अध्यक्षता में आयोजित हुआ। बैठक में हिंदी के प्रशासनिक, तकनीकी एवं डिजिटल उपयोग को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों का विस्तृत आकलन किया गया।

निरीक्षण दल में सहायक निदेशक (राजभाषा) श्री विशाल तथा वरिष्ठ प्रबंधक (हिंदी) श्री दिलीप कुमार सिंह शामिल रहे। दल ने सीसीएल मुख्यालय सहित विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों में हिंदी के प्रयोग, राजभाषा नीति के अनुपालन और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की समीक्षा की।

बैठक में सीसीएल के निदेशक (मानव संसाधन) श्री हर्ष नाथ मिश्र एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। प्रस्तुति के दौरान प्रशासनिक कार्यों, तकनीकी प्रक्रियाओं तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर हिंदी के बढ़ते उपयोग की जानकारी साझा की गई।

प्रमुख बिंदु

  • वित्त वर्ष 2025-26 में निर्धारित 18 कार्यशालाओं के लक्ष्य के विरुद्ध 19 कार्यशालाओं का आयोजन
  • हिंदी कार्यशालाओं में 105% उपलब्धि दर्ज
  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर हिंदी पोस्ट्स की संख्या अंग्रेजी पोस्ट्स से 77.45% अधिक
  • मासिक पत्रिका “अपनी बात” एवं वार्षिक पत्रिका “उत्कर्ष” की सराहना
  • तकनीकी एवं डिजिटल कार्यों में हिंदी के प्रभावी प्रयोग को सराहा गया
  • राजभाषा प्रशिक्षण कार्यक्रमों के विस्तार और रिक्त पदों को भरने पर चर्चा

निरीक्षण दल ने रजरप्पा, बोकारो, करगली, कथारा एवं ढोरी क्षेत्रों में भी राजभाषा कार्यों की समीक्षा की। डॉ. माणिक चंद्र पंडित ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हिंदी के प्रयोग को अधिक सरल, व्यवहारिक एवं जनसुलभ बनाने हेतु निरंतर नवाचार किए जाएं।

उन्होंने कहा कि राजभाषा हिंदी का प्रभावी कार्यान्वयन केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि प्रशासनिक दक्षता और जनसंपर्क को मजबूत बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

मंत्रालय के अधिकारियों ने सीसीएल द्वारा हिंदी के संस्थागत उपयोग की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि कंपनी भविष्य में भी राजभाषा संवर्धन के क्षेत्र में उत्कृष्ट मानक स्थापित करती रहेगी।