देश के पावर सेक्टर की दो प्रमुख सरकारी वित्तीय कंपनियों REC Limited और Power Finance Corporation Limited के बीच रणनीतिक विलय (Merger) की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। REC लिमिटेड के बोर्ड ऑफ डायरेकर्स ने कंपनी के PFC में विलय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह विलय Companies Act, 2013 की धारा 230-232 के तहत किया जाएगा।
कंपनी द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, इस प्रस्तावित विलय का उद्देश्य दोनों संस्थाओं के संचालन को एकीकृत करना, कार्यक्षमता बढ़ाना और पावर सेक्टर फाइनेंसिंग में मजबूत तालमेल स्थापित करना है। हालांकि, यह प्रक्रिया भारत के राष्ट्रपति तथा अन्य नियामकीय प्राधिकरणों की अंतिम मंजूरी के अधीन रहेगी।
बोर्ड बैठक में लिया गया बड़ा फैसला
16 मई 2026 को आयोजित REC लिमिटेड के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक में इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर विचार किया गया। बैठक के दौरान बोर्ड ने REC के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर को भारत के माननीय राष्ट्रपति के समक्ष औपचारिक आवेदन प्रक्रिया शुरू करने के लिए अधिकृत किया।
यह विलय भारत सरकार की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को अधिक मजबूत और प्रतिस्पर्धी बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पावर सेक्टर में वित्तीय संसाधनों का बेहतर उपयोग और तेज निर्णय प्रक्रिया संभव हो सकेगी।
शेयर एक्सचेंज रेशियो होगा तय
विलय प्रक्रिया के तहत दोनों कंपनियों के शेयरधारकों के हितों को ध्यान में रखते हुए शेयर एक्सचेंज रेशियो तय किया जाएगा। इसके लिए स्वतंत्र वैल्यूअर्स नियुक्त किए जाएंगे, जो पारदर्शी मूल्यांकन प्रक्रिया के आधार पर अंतिम अनुपात निर्धारित करेंगे।
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि विलय के बाद बनने वाली इकाई का ‘Government Company’ का दर्जा बरकरार रखा जाएगा। सभी कानूनी प्रक्रियाओं और मंजूरियों के बाद REC की सभी परिसंपत्तियां (Assets) और देनदारियां (Liabilities) PFC को हस्तांतरित कर दी जाएंगी और REC का स्वतंत्र अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।
कॉरपोरेट गवर्नेंस को भी मिला मजबूती
विलय घोषणा के साथ-साथ REC लिमिटेड ने कॉरपोरेट गवर्नेंस को मजबूत करने की दिशा में भी कदम उठाया है। बोर्ड ने श्री मोहम्मद अज़ाज़ अली को नया Chief Compliance Officer नियुक्त करने की मंजूरी दी है।
वर्तमान में वे General Manager (Finance) के पद पर कार्यरत हैं। वे 17 मई 2026 से यह जिम्मेदारी संभालेंगे और 30 जून 2028 को अपनी सेवानिवृत्ति तक इस पद पर बने रहेंगे। उनके पास Electronics Engineering और Finance में Business Administration की मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि है।
पावर सेक्टर पर पड़ेगा बड़ा असर
विशेषज्ञों के अनुसार, REC और PFC का विलय भारतीय पावर फाइनेंस सेक्टर में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। इससे परियोजना वित्तपोषण की क्षमता बढ़ेगी और बिजली क्षेत्र में निवेश को नई गति मिल सकती है। साथ ही, सरकारी वित्तीय संस्थानों की दक्षता और पूंजी उपयोग में भी सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
