भारत के स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए Garden Reach Shipbuilders & Engineers Ltd. (GRSE) ने एक ही दिन में तीन अत्याधुनिक नौसैनिक प्लेटफॉर्म—INS डुनागिरी, INS संशोधक और INS अग्रय—को Indian Navy को सौंप दिया।
यह “ट्रिपल डिलीवरी” भारतीय शिपबिल्डिंग इतिहास में पहली बार हुई है और यह सरकार के Aatmanirbhar Bharat अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
स्वदेशी युद्धपोत निर्माण में बड़ी उपलब्धि
इस डिलीवरी के साथ GRSE अब तक कुल 118 युद्धपोतों का निर्माण कर चुका है, जिनमें से 80 जहाज भारतीय नौसेना को सौंपे जा चुके हैं।
इन जहाजों को नौसेना की ओर से रियर एडमिरल Gautam Marwah (VSM) और कमोडोर Shishir Dixit सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने औपचारिक रूप से स्वीकार किया।
डिलीवर किए गए उन्नत प्लेटफॉर्म
INS डुनागिरी (प्रोजेक्ट 17A स्टेल्थ फ्रिगेट)
- लंबाई: 149 मीटर
- विस्थापन: 6,670 टन
- ब्रह्मोस मिसाइल, AESA रडार और एडवांस्ड कॉम्बैट सिस्टम से लैस
- हवा, सतह और पानी के नीचे—तीनों क्षेत्रों में युद्ध क्षमता
- डीजल और गैस टरबाइन से संचालित
INS संशोधक (सर्वे वेसल – लार्ज)
- लंबाई: 110 मीटर
- तटीय और गहरे समुद्र में सर्वेक्षण के लिए डिजाइन
- हेलीकॉप्टर संचालन, HADR मिशन और अस्पताल सुविधाएं
- एडवांस्ड सर्वे और डेटा कलेक्शन सिस्टम
- बेहतर संचालन के लिए बो और स्टर्न थ्रस्टर
INS अग्रय (ASW शैलो वाटर क्राफ्ट)
- लंबाई: लगभग 77.6 मीटर
- पनडुब्बी रोधी (Anti-Submarine Warfare) के लिए विशेष रूप से डिजाइन
- टॉरपीडो, ASW रॉकेट और 30 मिमी गन से लैस
- करीब 88% स्वदेशी सामग्री
- उथले पानी में उच्च गतिशीलता के लिए वॉटरजेट प्रोपल्शन
रणनीतिक महत्व
तीनों अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म की एक साथ डिलीवरी GRSE की:
- उत्पादन क्षमता में वृद्धि
- मल्टी-प्रोजेक्ट मैनेजमेंट क्षमता
- हाई-एंड युद्धपोत निर्माण दक्षता
को दर्शाती है।
यह उपलब्धि भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ घरेलू रक्षा निर्माण की परिपक्वता को भी दर्शाती है।
मजबूत ऑर्डर बुक
GRSE के पास फिलहाल एक मजबूत ऑर्डर पाइपलाइन है, जिसमें शामिल हैं:
- एक और प्रोजेक्ट 17A फ्रिगेट
- 4 ASW शैलो वाटर क्राफ्ट
- 4 नेक्स्ट जनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल
- 30 अन्य जहाज (13 निर्यात प्लेटफॉर्म सहित)
इसके अलावा, कंपनी 5 नेक्स्ट जनरेशन कॉर्वेट्स के बड़े कॉन्ट्रैक्ट को हासिल करने के उन्नत चरण में है। यह “ट्रिपल डिलीवरी” न केवल GRSE की तकनीकी क्षमता का प्रमाण है, बल्कि भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदमों का भी सशक्त संकेत है।
