केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने मंगलवार को भारतीय कोयला कंपनियों के लिए पहली क्षेत्रव्यापी कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) रूपरेखा लॉन्च की। नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) की प्रमुख स्वास्थ्य संबंधी सीएसआर पहलों थैलेसीमिया बाल सेवा योजना (TBSY) और ‘नन्हा सा दिल’ की उपलब्धियों को भी रेखांकित किया गया। इन दोनों पहलों के तहत अब तक 1,050 से अधिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट और 1,500 से अधिक सुधारात्मक हृदय सर्जरी की जा चुकी हैं।
कोयला क्षेत्र के लिए पहली क्षेत्र-विशिष्ट सीएसआर रूपरेखा
कोयला मंत्रालय ने सीआईएल के सहयोग से नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान यह नई सीएसआर रूपरेखा पेश की। कार्यक्रम में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी, राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे, कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त, वरिष्ठ अधिकारी, चिकित्सा विशेषज्ञ, कार्यान्वयन भागीदार और लाभार्थी परिवार शामिल हुए।
कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत वैधानिक सीएसआर व्यवस्था लागू होने के बाद यह कोयला क्षेत्र के लिए पहली क्षेत्र-विशिष्ट सीएसआर रूपरेखा है। इसे भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान (IICA) ने तैयार किया है। इसका उद्देश्य कोयला खनन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की जरूरतों के अनुरूप अधिक प्रभावशाली, पारदर्शी और परिणामोन्मुख सीएसआर पहलों को बढ़ावा देना है।
1,050 से अधिक बच्चों को बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा
सीआईएल की थैलेसीमिया बाल सेवा योजना थैलेसीमिया और एप्लास्टिक एनीमिया जैसे दुर्लभ आनुवंशिक रक्त विकारों से पीड़ित बच्चों के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य पहल बनकर उभरी है। योजना का नेटवर्क शुरुआती चार अस्पतालों से बढ़कर अब 21 सूचीबद्ध अस्पतालों तक पहुंच गया है।
इस योजना के तहत बोन मैरो ट्रांसप्लांट (BMT) के लिए प्रति मरीज 10 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाती है। चार चरणों में इस योजना के लिए कुल 130 करोड़ रुपये का परिव्यय निर्धारित किया गया है। सहायता राशि सीधे सूचीबद्ध अस्पतालों को उपलब्ध कराई जाती है।
अब तक योजना के तहत 1,050 से अधिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट पूरे किए जा चुके हैं। सीआईएल के अनुसार, उपचार प्राप्त करने वाले बड़ी संख्या में बच्चे अब सामान्य और स्वस्थ जीवन जी रहे हैं।
योजना का क्रियान्वयन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निगरानी मार्गदर्शन में थैलेसिमिक्स इंडिया के समन्वय से किया जा रहा है।
‘नन्हा सा दिल’ से 1,500 से ज्यादा हृदय सर्जरी
जन्मजात हृदय दोष से पीड़ित बच्चों के उपचार के लिए सीआईएल ने ‘नन्हा सा दिल’ पहल शुरू की है। अनुमान के अनुसार, भारत में हर वर्ष करीब 2.4 लाख नवजात बच्चे जन्मजात हृदय दोष से प्रभावित होते हैं, जबकि इनमें से लगभग 5 प्रतिशत को ही समय पर उपचार मिल पाता है।
मार्च 2024 में झारखंड के चार जिलों से श्री सत्य साईं हेल्थ एंड एजुकेशन ट्रस्ट के साथ साझेदारी में शुरू हुई इस पहल का बाद में सीआईएल की सहायक कंपनियों एसईसीएल, सीसीएल, एनसीएल और डब्ल्यूसीएल तक विस्तार किया गया।
आधुनिक नैदानिक उपकरणों की मदद से अब तक दो लाख से अधिक बच्चों की जांच की जा चुकी है और 1,500 से अधिक सुधारात्मक हृदय सर्जरी पूरी की गई हैं। लाभार्थी परिवारों के लिए उपचार पूरी तरह निशुल्क है। इसमें यात्रा और अस्पताल में भर्ती होने से जुड़े खर्च भी शामिल हैं।
स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका पर सीआईएल का जोर
केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने पिछले एक दशक के दौरान स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, आजीविका और सामुदायिक विकास के क्षेत्र में सीआईएल की सीएसआर प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने थैलेसीमिया बाल सेवा योजना, ‘नन्हा सा दिल’ और एसईसीएल की ‘सुश्रुत’ पहल को महत्वपूर्ण प्रयास बताया।
उन्होंने कहा कि थैलेसीमिया और जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों के हित में केंद्र और राज्य सरकारों, कार्यान्वयन एजेंसियों तथा अभिभावक संघों सहित समाज के विभिन्न वर्गों की सामूहिक भागीदारी जरूरी है। उन्होंने लाभार्थी बच्चों की शैक्षिक जरूरतों में सहयोग का भी आश्वासन दिया।
राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि हर बच्चे को बेहतर उपचार, आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए सीआईएल की सीएसआर पहलों की सराहना की।
स्थानीय जरूरतों के अनुरूप हो सीएसआर
कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त ने कहा कि सीआईएल की सीएसआर योजनाओं ने जरूरतमंद बच्चों और उनके परिवारों तक जीवनरक्षक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने डॉक्टरों, सूचीबद्ध अस्पतालों और भागीदार संगठनों के योगदान की सराहना की।
उन्होंने कहा कि इन पहलों में गुणवत्ता-सुनिश्चित उपचार, वास्तविक समय में मामलों की निगरानी, पारदर्शिता, जवाबदेही और विस्तार क्षमता पर विशेष ध्यान दिया गया है।
कोयला मंत्रालय की अपर सचिव रुपिंदर बरार ने कहा कि सीएसआर का वास्तविक उद्देश्य लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना, समुदायों को सशक्त बनाना और जरूरतमंदों के लिए नए अवसर पैदा करना है। उन्होंने सीएसआर योजनाओं को स्थानीय जरूरतों के आधार पर तैयार करने और उनके परिणामों का ठोस उपलब्धियों के आधार पर आकलन करने पर जोर दिया।
भारत में हर साल 10 हजार से अधिक बच्चे थैलेसीमिया के साथ जन्म लेते हैं
मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल की ट्रांसप्लांट यूनिट के प्रमुख डॉ. शांतनु सेन ने कहा कि भारत में हर वर्ष 10 हजार से अधिक बच्चे थैलेसीमिया के साथ जन्म लेते हैं। ऐसे बच्चों का जीवन नियमित रक्त आधान पर निर्भर रहता है और कई मामलों में वे लंबे समय तक जीवित नहीं रह पाते।
उन्होंने बताया कि थैलेसीमिया के लिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट वर्तमान में उपलब्ध प्रमुख उपचार विकल्प है, लेकिन इसकी ऊंची लागत अभिभावकों के सामने बड़ी चुनौती है। उन्होंने जरूरतमंद बच्चों तक इस जीवनरक्षक उपचार को पहुंचाने के लिए सीआईएल की थैलेसीमिया बाल सेवा योजना की सराहना की।
लाभार्थी परिवारों ने साझा किए अनुभव
कार्यक्रम में लाभार्थी बच्चों और उनके परिवारों ने सीआईएल, कोयला मंत्रालय, डॉक्टरों, अस्पतालों और सहयोगी संगठनों के प्रति आभार व्यक्त किया। परिवारों ने बताया कि समय पर उपचार ने बच्चों को नई उम्मीद और आत्मविश्वास दिया है।
कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि इन सीएसआर पहलों का प्रभाव केवल उपचार के आंकड़ों तक सीमित नहीं है। बच्चों के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव, उनके आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य की उम्मीद इन योजनाओं के वास्तविक मानवीय प्रभाव को दर्शाती है।
पुस्तक का विमोचन और लघु फिल्मों का प्रदर्शन
कार्यक्रम के दौरान थैलेसीमिया बाल सेवा योजना पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया गया। इसके साथ ही स्वास्थ्य क्षेत्र में सीआईएल की सीएसआर पहलों पर आधारित लघु फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। डॉक्टरों और विशिष्ट गणमान्य व्यक्तियों का सम्मान भी किया गया तथा लाभार्थी परिवारों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया।