धनबाद: बिजली क्षेत्र की बढ़ती कोयला आवश्यकता को देखते हुए भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) ने कोयला प्रेषण और निकासी व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में प्रयास तेज कर दिए हैं। इसी क्रम में बीसीसीएल के सीएमडी श्री मनोज कुमार अग्रवाल ने कुसुंडा क्षेत्र की विभिन्न साइडिंग एवं परिचालन सुविधाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कोयला निकासी की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को डिस्पैच क्षमता बढ़ाने और निर्बाध परिचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान सीएमडी ने KDS-II साइडिंग पर वर्तमान 0.7 रेक प्रतिदिन के कोयला डिस्पैच को बढ़ाकर 3 रेक प्रतिदिन करने का लक्ष्य निर्धारित किया। इसी तरह KDS-K साइडिंग पर वर्तमान 0.6 रेक प्रतिदिन के डिस्पैच को बढ़ाकर 2 से 2.5 रेक प्रतिदिन करने के निर्देश दिए गए।
24×7 मेंटेनेंस और बेहतर प्रकाश व्यवस्था पर जोर
सीएमडी श्री अग्रवाल ने साइडिंग में उपलब्ध प्रकाश व्यवस्था, क्रशर संचालन और अन्य परिचालन सुविधाओं का भी जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि परिचालन में किसी भी प्रकार का व्यवधान न आए, इसके लिए मेंटेनेंस टीमों की 24×7 साइट पर उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने विशेष रूप से रात्रिकालीन परिचालन के दौरान पर्याप्त और प्रभावी प्रकाश व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया, ताकि कोयला लोडिंग एवं डिस्पैच की प्रक्रिया सुचारु रूप से जारी रह सके।
ट्रांसपोर्टरों से किया संवाद
निरीक्षण के दौरान सीएमडी ने कोयला परिवहन से जुड़े ट्रांसपोर्टरों से भी संवाद किया। उन्होंने उपलब्ध साइडिंग क्षमता का अधिकतम उपयोग करते हुए कोयला परिवहन और डिस्पैच को बढ़ाने पर जोर दिया।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों, ट्रांसपोर्टरों और अन्य हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता बताई, ताकि कोयला निकासी की प्रक्रिया में किसी तरह की बाधा न आए और निर्धारित डिस्पैच लक्ष्य को हासिल किया जा सके।
बिजली क्षेत्र की मांग के अनुरूप आपूर्ति मजबूत करने की पहल
बीसीसीएल की प्राथमिकताओं में साइडिंग क्षमता का बेहतर उपयोग, परिचालन दक्षता में वृद्धि और निर्बाध कोयला निकासी सुनिश्चित करना शामिल है। साइडिंग की डिस्पैच क्षमता बढ़ाने के इन प्रयासों से बिजली क्षेत्र को कोयले की आपूर्ति अधिक प्रभावी ढंग से करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
बीसीसीएल द्वारा कोयला प्रेषण एवं निकासी व्यवस्था की लगातार निगरानी की जा रही है। परिचालन स्तर पर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाकर डिस्पैच प्रक्रिया को अधिक सुचारु, व्यवस्थित और प्रभावी बनाने पर कंपनी का जोर है।
इन प्रयासों का उद्देश्य उपलब्ध बुनियादी ढांचे की क्षमता का अधिकतम उपयोग करते हुए कोयला प्रेषण बढ़ाना और बिजली क्षेत्र की बढ़ती आवश्यकता के अनुरूप आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करना है।