भारत की समुद्री ताकत में बड़ा इजाफा, GRSE ने लॉन्च किया स्वदेशी रिसर्च वेसल ‘Sagar Manthan’

कोलकाता, 9 सितंबर 2026: भारत के समुद्री अनुसंधान और स्वदेशी जहाज निर्माण क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। रक्षा मंत्रालय के अधीन नवरत्न डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग Garden Reach Shipbuilders and Engineers (GRSE) Ltd. ने बुधवार को National Centre for Polar and Ocean Research (NCPOR) के लिए निर्मित किए जा रहे Ocean Research Vessel (ORV) को लॉन्च किया। इस अत्याधुनिक रिसर्च वेसल का नाम ‘Sagar Manthan’ रखा गया है।

यह पोत पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत भारत सरकार के Deep Ocean Mission को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। खास बात यह है कि GRSE ने कील बिछाए जाने के महज करीब पांच महीने बाद ही पोत को लॉन्च कर अपनी जहाज निर्माण क्षमता और समयबद्ध परियोजना निष्पादन को प्रदर्शित किया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह रहे मुख्य अतिथि

GRSE के ऋषि बंकिम शिपयार्ड, कोलकाता में आयोजित लॉन्च समारोह में केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। वह विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार संभालते हैं।

कार्यक्रम में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. श्रीनिवास कुमार तुम्मला विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। GRSE, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और NCPOR के वरिष्ठ अधिकारी भी समारोह में उपस्थित रहे।

परंपरा के अनुसार पोत का नामकरण डॉ. जितेंद्र सिंह की पत्नी श्रीमती मंजू सिंह ने किया, जबकि डॉ. श्रीनिवास कुमार तुम्मला की पत्नी श्रीमती कविता एलांती ने पोत का शुभारंभ किया।

89.5 मीटर लंबा होगा ‘Sagar Manthan’

GRSE द्वारा निर्मित किया जा रहा ‘Sagar Manthan’ करीब 89.50 मीटर लंबा और 18.80 मीटर चौड़ा होगा। इसका सकल टन भार (Gross Tonnage) लगभग 5,900 टन होगा और यह 90 प्रतिशत Maximum Continuous Rating (MCR) पर 14 नॉट की गति से चल सकेगा।

डिलीवरी के बाद यह अत्याधुनिक पोत तटीय समुद्रों के साथ-साथ गहरे समुद्री क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार के वैज्ञानिक और भू-भौतिकीय सर्वेक्षण करने में सक्षम होगा।

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6 किलोमीटर की गहराई तक समुद्री अनुसंधान

‘Sagar Manthan’ की सबसे महत्वपूर्ण क्षमताओं में Underway Swath Multibeam और Geophysical Seismic Surveys शामिल हैं। पोत अधिकतम 6 किलोमीटर की गहराई तक समुद्री अनुसंधान गतिविधियों को अंजाम देने में सक्षम होगा।

इसके अलावा पोत के जरिए Conductivity, Temperature and Depth (CTD) Profiling, पानी के नमूनों का संग्रह और विभिन्न प्रकार के जैविक नमूने एकत्र किए जा सकेंगे। इसके लिए वर्टिकल और हॉरिजॉन्टल दोनों तरीकों से विभिन्न नेट का इस्तेमाल किया जाएगा।

समुद्र की सतह से लेकर समुद्र तल तक रिसर्च

रिसर्च वेसल को समुद्री अनुसंधान की व्यापक जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। यह पोत Surface और Deep-Sea Mooring तथा Data Buoy Operations को अंजाम दे सकेगा।

इसके अलावा समुद्र तल से नमूने एकत्र करने के लिए Corers और Grabs तथा Chain Bag Dredges के माध्यम से Rock Dredging भी की जा सकेगी।

पोत पर वैज्ञानिकों को वातावरण संबंधी अध्ययन, सतही मौसम संबंधी अवलोकन, समुद्री धाराओं का मापन और ऊपरी वायुमंडलीय आंकड़ों का संग्रह करने की सुविधा मिलेगी। जहाज पर ही वैज्ञानिक विश्लेषण और डेटा प्रोसेसिंग की व्यवस्था भी होगी।

वैज्ञानिकों और तकनीशियनों को मिलेगा प्रशिक्षण

‘Sagar Manthan’ केवल समुद्री अनुसंधान तक सीमित नहीं रहेगा। यह पोत वैज्ञानिकों और तकनीशियनों के लिए Training और Education Platform के रूप में भी काम करेगा। इससे भारत में समुद्री विज्ञान, महासागर अनुसंधान और गहरे समुद्र की तकनीकी क्षमताओं को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

GRSE की स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता को मिली नई पहचान

GRSE पिछले करीब चार दशकों से भारतीय नौसेना के लिए सर्वे वेसल और अन्य विशेषीकृत जहाजों का निर्माण करता रहा है। शिपयार्ड ने 1980 के दशक में भारतीय नौसेना के लिए सर्वे जहाज बनाए थे।

GRSE ने वर्ष 1994 में Naval Physical and Oceanographic Laboratory (NPOL) के लिए Marine Acoustic Research Vessel INS Sagardhwani का भी निर्माण किया था। यह पोत आज भी सेवा में है और हाल ही में इसका रिफिट भी GRSE में किया गया।

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इसके अलावा GRSE भारतीय नौसेना के लिए चार Survey Vessels (Large) का निर्माण और डिलीवरी पूरी कर चुका है। इनमें अंतिम पोत INS Sanshodhak की डिलीवरी 30 मार्च 2026 को हुई थी। ये भारत में निर्मित और नौसेना द्वारा संचालित अब तक के सबसे बड़े सर्वे जहाजों में शामिल हैं।

GRSE के पास कई बड़े प्रोजेक्ट

GRSE इस समय भारतीय नौसेना के लिए नौ युद्धपोतों का निर्माण कर रहा है। इनमें Project 17A के तहत एक Advanced Guided Missile Frigate, चार ASW-SWC और चार Next Generation Offshore Patrol Vessels शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त शिपयार्ड के पास 32 अन्य प्लेटफॉर्म का निर्माण कार्य भी चल रहा है, जिनमें 13 जहाज निर्यात के लिए बनाए जा रहे हैं। GRSE भारतीय नौसेना के लिए पांच Next Generation Corvettes के निर्माण से जुड़े महत्वपूर्ण अनुबंध को अंतिम रूप देने के उन्नत चरण में भी है।

रिसर्च शिपिंग के क्षेत्र में GRSE NCPOR के लिए ‘Sagar Manthan’ के अलावा NPOL के लिए एक Acoustic Research Ship (ARS) और Geological Survey of India के लिए दो Coastal Research Vessels (CRVs) भी बना रहा है।

‘आत्मनिर्भर भारत’ को मिलेगी मजबूती

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि GRSE में बन रहा यह पोत भारत की स्वदेशी जहाज निर्माण, इंजीनियरिंग और वैज्ञानिक क्षमताओं की बढ़ती ताकत का प्रतिनिधित्व करता है।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. श्रीनिवास कुमार तुम्मला ने कहा कि उन्हें पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के लिए GRSE द्वारा निर्मित किए जा रहे Ocean Research Vessel के लॉन्च का हिस्सा बनकर खुशी हुई। उन्होंने इसे भारत सरकार के महत्वपूर्ण Deep Ocean Mission से जुड़ी परियोजना बताया और NCPOR तथा GRSE से इसी गति को बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने मंत्रालय की ओर से हरसंभव सहयोग का आश्वासन भी दिया।

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GRSE के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक Cmde PR Hari, IN (Retd.) ने कहा कि GRSE युद्धपोत निर्माण में आत्मनिर्भरता का प्रतीक है और अब चार अत्याधुनिक विशेषीकृत रिसर्च वेसल के निर्माण के साथ कंपनी युद्धपोतों और रिसर्च वेसल दोनों के डिजाइन एवं निर्माण में आत्मनिर्भरता को प्रदर्शित कर रही है।

800 से अधिक प्लेटफॉर्म बना चुका है GRSE

1884 में एक छोटी वर्कशॉप के रूप में शुरू हुआ GRSE आज भारत के प्रमुख जहाज निर्माण संस्थानों में शामिल है। भारत सरकार ने वर्ष 1960 में कंपनी का अधिग्रहण किया था।

GRSE को स्वतंत्र भारत में भारतीय नौसेना के लिए पहला युद्धपोत बनाने का गौरव प्राप्त है। कंपनी ने 1961 में Seaward Defence Boat INS Ajay का निर्माण किया था।

GRSE ने मॉरीशस सरकार के लिए भारत का पहला निर्यात युद्धपोत CGS Barracuda, सेशेल्स के लिए Fast Patrol Vessel SCG PS Zoroaster और गुयाना के लिए Ocean-Going Cargo & Passenger Ferry MV Ma Lisha भी बनाया है।

कंपनी अब तक 800 से अधिक प्लेटफॉर्म, जिनमें भारतीय नौसेना, भारतीय तटरक्षक बल और मित्र देशों के लिए 118 युद्धपोत शामिल हैं, का निर्माण कर चुकी है। GRSE के पास चार अलग-अलग शिपयार्ड हैं और इसकी मौजूदा बुनियादी ढांचा क्षमता एक समय में 28 जहाजों के समानांतर निर्माण की अनुमति देती है।

GRSE का विस्तार अब केवल जहाज निर्माण और जहाज मरम्मत तक सीमित नहीं है। कंपनी प्री-फैब्रिकेटेड स्टील ब्रिज, डेक मशीनरी, मरीन डीजल इंजन की असेंबली, टेस्टिंग एवं ओवरहॉलिंग और 30mm Naval Surface Guns जैसे इंजीनियरिंग उत्पादों के क्षेत्र में भी काम कर रही है।

‘Sagar Manthan’ का लॉन्च भारत की आत्मनिर्भरता, Make in India और Deep Ocean Mission को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।