Coal India Limited ने बढ़ती लागत खुद उठाई, उपभोक्ताओं को महंगाई से राहत

Coal India Limited बढ़ती वैश्विक महंगाई और कच्चे माल की कीमतों में उछाल के बावजूद उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए खुद अतिरिक्त लागत वहन कर रही है। कंपनी ने अमोनियम नाइट्रेट और औद्योगिक डीज़ल की बढ़ती कीमतों के प्रभाव को संतुलित करते हुए कोयले की कीमतों को स्थिर बनाए रखने के लिए रणनीतिक कदम उठाए हैं, जिससे देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता पर बोझ कम हो सके।

Coal India Limited बढ़ती लागत को खुद वहन कर उपभोक्ताओं को राहत दे रही है

Coal India Limited (CIL) बढ़ती परिचालन लागत—खासतौर पर विस्फोटकों और औद्योगिक डीज़ल की कीमतों—को खुद वहन कर रही है, ताकि कोयले की कीमतों में बढ़ोतरी का बोझ आम उपभोक्ताओं पर न पड़े। वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव और महंगाई के बावजूद कंपनी सस्ती दरों पर कोयला उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

बढ़ती लागत से निपटने की रणनीति

CIL ने अमोनियम नाइट्रेट (AN) और औद्योगिक डीज़ल जैसी प्रमुख कच्ची सामग्रियों की कीमतों में आई तेज़ बढ़ोतरी को खुद झेलने का फैसला किया है। यह बढ़ोतरी वैश्विक परिस्थितियों के कारण हुई है, जिससे कोयले की कीमत बढ़ने का खतरा था। कंपनी के इस कदम का उद्देश्य ऊर्जा लागत में संभावित वृद्धि से भारतीय अर्थव्यवस्था को बचाना है।

कच्चे माल की कीमतों में भारी उछाल

अमोनियम नाइट्रेट, जो ओपनकास्ट माइनिंग में इस्तेमाल होने वाले विस्फोटकों का लगभग 60% हिस्सा होता है, उसकी कीमत में 44% की वृद्धि हुई है। यह कीमत 50,500 रुपये प्रति मीट्रिक टन से बढ़कर 1 अप्रैल 2026 तक 72,750 रुपये प्रति मीट्रिक टन हो गई।

इसके परिणामस्वरूप, फरवरी से मार्च 2026 के बीच CIL द्वारा उपयोग किए जाने वाले विस्फोटकों की औसत लागत में लगभग 26% की वृद्धि दर्ज की गई।

वहीं, औद्योगिक डीज़ल की कीमत में भी लगभग 54% का उछाल आया है। यह कीमत मार्च 2026 के मध्य में 92 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर अप्रैल की शुरुआत तक 142 रुपये प्रति लीटर हो गई।

CIL का वार्षिक विस्फोटक उपभोग 9 लाख मीट्रिक टन है, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में डीज़ल की खपत 4.19 लाख किलोलीटर (KL) रही।

बाजार को स्थिर रखने के लिए कदम

सिर्फ लागत वहन करने तक सीमित न रहकर, CIL ने बाजार को स्थिर रखने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। कंपनी की कुछ सहायक इकाइयों ने सिंगल विंडो मोड एग्नॉस्टिक ई-ऑक्शन में कोयले के रिज़र्व प्राइस को कम किया है।

इसके अलावा, कंपनी नीलामी की आवृत्ति और बाजार में उपलब्ध कराए जाने वाले कोयले की मात्रा दोनों बढ़ा रही है। इन कदमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोयला सस्ती दरों पर उपलब्ध रहे और आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।

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