कोच्चि: भारत की प्रमुख शिपबिल्डिंग कंपनियों में शामिल कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (Cochin Shipyard Limited) ने वित्त वर्ष 2025-26 में कारोबार के मोर्चे पर मजबूत प्रदर्शन किया है। कंपनी का कंसोलिडेटेड टर्नओवर FY26 में बढ़कर ₹5,022 करोड़ हो गया, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह ₹4,820 करोड़ था। हालांकि, इस दौरान कंपनी के मुनाफे पर दबाव देखने को मिला और प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) ₹827 करोड़ से घटकर ₹717 करोड़ रह गया।
₹22,000 करोड़ से ज्यादा का ऑर्डर बुक
कोचीन शिपयार्ड की सबसे बड़ी ताकत उसका मजबूत ऑर्डर बुक है। FY26 के दौरान कंपनी के पास ₹22,000 करोड़ से अधिक के ऑर्डर थे, जो आने वाले वर्षों में कंपनी को अच्छी राजस्व दृश्यता प्रदान करते हैं। जहाज निर्माण और शिप रिपेयर से जुड़े कारोबार में बढ़ती मांग के बीच यह ऑर्डर बुक कंपनी की भविष्य की विकास संभावनाओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कंपनी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण कॉन्ट्रैक्ट मिले हैं। इनमें CMA CGM के लिए छह LNG-फ्यूल्ड कंटेनर जहाज और Svitzer के लिए इलेक्ट्रिक टग्स जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं। ये ऑर्डर कोचीन शिपयार्ड की विशेषीकृत जहाज निर्माण क्षमताओं और वैश्विक बाजार में उसकी स्थिति को मजबूत करते हैं।
CRUISE 2030 2.0 पर फोकस
कंपनी अपने CRUISE 2030 2.0 रणनीतिक रोडमैप के तहत क्षमता विस्तार और कारोबार को बढ़ाने पर काम कर रही है। इसी क्रम में शिप रिपेयर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए गुजरात के वडीनार में दूसरा शिप रिपेयर क्लस्टर विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना में करीब ₹1,570 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है।
यह विस्तार ऐसे समय में हो रहा है जब भारत सरकार देश में स्वदेशी जहाज निर्माण, समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर और शिप रिपेयर क्षमता को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। ऐसे में कोचीन शिपयार्ड के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में अवसर बढ़ सकते हैं।
मुनाफे में गिरावट बनी चुनौती
टर्नओवर बढ़ने के बावजूद FY26 में PAT में गिरावट कंपनी के लिए महत्वपूर्ण बिंदु है। ₹717 करोड़ का PAT पिछले साल के ₹827 करोड़ से कम रहा। इसलिए आने वाले समय में बड़े ऑर्डर बुक को समय पर पूरा करने के साथ-साथ लागत नियंत्रण और मार्जिन में सुधार कंपनी के प्रदर्शन के लिए अहम होंगे।
बोर्ड गवर्नेंस पर SEBI अनुपालन का दबाव
कोचीन शिपयार्ड के सामने एक महत्वपूर्ण कॉरपोरेट गवर्नेंस चुनौती भी बनी हुई है। 31 मार्च 2026 तक कंपनी के बोर्ड में केवल एक स्वतंत्र निदेशक था, जबकि लागू नियमों के तहत छह स्वतंत्र निदेशकों की आवश्यकता बताई गई है। कंपनी ने इसका कारण CPSE होने और स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति में भारत सरकार की भूमिका को बताया है। इस अनुपालन कमी के चलते स्टॉक एक्सचेंजों की ओर से जुर्माना भी लगाया जा चुका है।
अब निवेशकों की नजर स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति और बोर्ड संरचना को नियामकीय आवश्यकताओं के अनुरूप लाने पर रहेगी। साथ ही, कंपनी किस तरह अपने बड़े ऑर्डर बुक को लाभदायक तरीके से निष्पादित करती है, यह भी भविष्य के प्रदर्शन के लिए महत्वपूर्ण होगा।
डिविडेंड भी जारी
FY26 में कंपनी ने कुल ₹9 प्रति शेयर के डिविडेंड का भुगतान घोषित किया। इससे शेयरधारकों को रिटर्न देने के साथ कंपनी की मजबूत नकदी स्थिति का भी संकेत मिलता है।
कुल मिलाकर, FY26 में कोचीन शिपयार्ड की तस्वीर मिश्रित रही। बढ़ता टर्नओवर, ₹22,000 करोड़ से अधिक का ऑर्डर बुक और क्षमता विस्तार कंपनी के सकारात्मक पहलू हैं, जबकि घटता PAT और बोर्ड गवर्नेंस से जुड़ा SEBI अनुपालन मुद्दा प्रमुख चुनौतियां हैं। आने वाले समय में ऑर्डर निष्पादन, मार्जिन सुधार और बोर्ड में स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति कंपनी के लिए प्रमुख निगरानी बिंदु होंगे।