HAL ने बनाया 2,000वां एयरो-इंजन, Shakti इंजन की दूसरी प्रोडक्शन लाइन का ऐलान

कोरापुट: भारत की स्वदेशी एयरो-इंजन निर्माण क्षमता को बढ़ावा देने की दिशा में Hindustan Aeronautics Limited (HAL) ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने HAL की कोरापुट डिवीजन में तैयार किए गए 2,000वें एयरो-इंजन की डिलीवरी देखी। इस अवसर पर उन्होंने Shakti इंजन के लिए दूसरी प्रोडक्शन लाइन स्थापित करने की घोषणा भी की।

रक्षा मंत्री ने कहा कि उन्नत एयरो-इंजन के डिजाइन, विकास, परीक्षण, निर्माण और रखरखाव में स्वदेशी क्षमता मजबूत करना जरूरी है। उनके अनुसार, propulsion technology में महारत हासिल करना भारत के एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए महत्वपूर्ण है।

Shakti इंजन की दूसरी उत्पादन लाइन पर ₹218 करोड़ का निवेश

रक्षा मंत्री के अनुसार, Shakti इंजन की प्रस्तावित दूसरी प्रोडक्शन लाइन पर करीब ₹218 करोड़ का निवेश किया जाएगा। इस नई उत्पादन लाइन की स्थापना के बाद हर साल 100 तक Shakti इंजन बनाए जा सकेंगे।

नई उत्पादन लाइन को पूरी तरह स्थापित करने का लक्ष्य 2028-29 रखा गया है। इससे Shakti इंजन के उत्पादन में बढ़ोतरी होगी और देश की स्वदेशी हेलीकॉप्टर इंजन निर्माण क्षमता को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

HAL की AL-31FP उत्पादन क्षमता भी बढ़ेगी

HAL अपनी AL-31FP एयरो-इंजन उत्पादन क्षमता को भी बढ़ा रहा है। रक्षा मंत्री ने बताया कि इसके लिए करीब ₹335 करोड़ का निवेश किया जा रहा है।

इस विस्तार के बाद HAL की वार्षिक AL-31FP उत्पादन क्षमता 30 इंजन से बढ़कर 50 इंजन हो जाएगी। इससे भारतीय रक्षा क्षेत्र के लिए आवश्यक एयरो-इंजन की घरेलू उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी।

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एयरो-इंजन क्षेत्र में ₹5,000 करोड़ के निवेश की योजना

राजनाथ सिंह ने एयरो-इंजन क्षेत्र में करीब ₹5,000 करोड़ के प्रस्तावित निवेश का भी उल्लेख किया। इसके तहत उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ स्वदेशी तकनीक और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

कच्चे माल के स्वदेशीकरण के लिए Mishra Dhatu Nigam Limited (MIDHANI) के साथ साझेदारी की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य एयरो-इंजन निर्माण में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण कच्चे माल के लिए घरेलू क्षमता विकसित करना है।

भारत में बनेगी स्वदेशी हाई-थ्रस्ट इंजन टेस्टिंग सुविधा

कार्यक्रम में भारत की पहली स्वदेशी हाई-थ्रस्ट इंजन टेस्टिंग सुविधा स्थापित करने की योजना भी सामने रखी गई। यह सुविधा देश में उन्नत एयरो-इंजन के परीक्षण और विकास क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत को एयरो-इंजन क्षेत्र में केवल असेंबली या निर्माण तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि डिजाइन, विकास, परीक्षण, निर्माण और रखरखाव की पूरी क्षमता देश में विकसित करनी होगी।

इस अवसर पर ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, रक्षा उत्पादन सचिव संजय कुमार, डिप्टी चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर मार्शल तेजल सिंह, एयरो विभाग की संयुक्त सचिव मनीषा चंद्रा, HAL के CMD रवि के और MIDHANI के CMD डॉ. एस.वी.एस. नारायण मूर्ति सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

HAL की कोरापुट डिवीजन से 2,000वें एयरो-इंजन की डिलीवरी और Shakti इंजन की दूसरी उत्पादन लाइन की घोषणा भारत की स्वदेशी propulsion क्षमता को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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