REC ने जारी किया भारत का पहला ₹500 करोड़ Tokenised Corporate Bond

नई दिल्ली: सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख वित्तीय कंपनी REC Limited ने भारतीय वित्तीय बाजार में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने ₹500 करोड़ की भारत की पहली Tokenised Corporate Bond सफलतापूर्वक पूरी की है। यह लेनदेन देश के कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में ब्लॉकचेन आधारित तकनीक और डिजिटल सेटलमेंट की संभावनाओं को आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इस बॉन्ड इश्यू में 7.30 प्रतिशत का कूपन है और इसकी परिपक्वता अवधि 1 साल 8 महीने बताई गई है। इश्यू का बेस साइज ₹100 करोड़ था, जबकि अतिरिक्त ₹400 करोड़ के लिए ग्रीनशू विकल्प का इस्तेमाल किया गया, जिससे कुल राशि ₹500 करोड़ तक पहुंची।

ब्लॉकचेन से बदलेगा बॉन्ड बाजार

Tokenisation का अर्थ किसी पारंपरिक वित्तीय परिसंपत्ति, जैसे कॉरपोरेट बॉन्ड, के स्वामित्व और लेनदेन को डिजिटल टोकन के रूप में रिकॉर्ड करना है। इस प्रक्रिया में ब्लॉकचेन या Distributed Ledger Technology का उपयोग किया जा सकता है। इससे लेनदेन में कई पारंपरिक प्रक्रियाओं और मध्यस्थों पर निर्भरता कम करने तथा सेटलमेंट को तेज बनाने की संभावना है।

REC की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब भारत अपने पूंजी बाजार और डिजिटल वित्तीय ढांचे को आधुनिक बनाने पर जोर दे रहा है। इस पायलट में डिजिटल भुगतान और सिक्योरिटीज सेटलमेंट के लिए Central Bank Digital Currency (CBDC) आधारित व्यवस्था का उपयोग किया गया है।

संस्थागत निवेशकों तक सीमित पायलट

फिलहाल इस तरह के लेनदेन में भागीदारी के लिए विशेष डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर की जरूरत है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, शुरुआती पायलट में ऐसे संस्थागत प्रतिभागियों को शामिल किया गया है, जिनके पास आवश्यक CBDC वॉलेट और नई डिजिटल सिक्योरिटीज इन्फ्रास्ट्रक्चर की सुविधा उपलब्ध है।

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REC की सफल Tokenised Bond transaction को भारतीय डेट मार्केट में एक महत्वपूर्ण प्रयोग के तौर पर देखा जा रहा है। इससे भविष्य में अन्य कंपनियों के लिए भी डिजिटल बॉन्ड जारी करने और सेटलमेंट की संभावनाएं खुल सकती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, Tokenisation से सेटलमेंट में तेजी, लेनदेन लागत में कमी और बाजार में संभावित liquidity improvement जैसे फायदे मिल सकते हैं। हालांकि, फिलहाल यह व्यवस्था संस्थागत स्तर के पायलट तक सीमित है और इसके व्यापक इस्तेमाल के लिए नियामकीय तथा तकनीकी ढांचे का और विकास जरूरी होगा।

REC की यह उपलब्धि भारत के कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार के डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और भविष्य में ब्लॉकचेन आधारित वित्तीय उत्पादों के विस्तार का रास्ता मजबूत कर सकती है।