South Eastern Coalfields Limited (SECL) ने कोयला परिवहन अवसंरचना को मजबूत करने और भविष्य की उत्पादन वृद्धि को समर्थन देने के उद्देश्य से Konkan Railway Corporation Limited (KRCL) के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
29 मई 2026 को बिलासपुर स्थित SECL मुख्यालय में हुए इस समझौते के तहत छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश स्थित SECL के कोयला क्षेत्रों में रणनीतिक रेल अवसंरचना का विकास किया जाएगा।
SECL और KRCL मिलकर विकसित करेंगे भविष्य की रेल नेटवर्क
यह साझेदारी SECL की उत्पादन विस्तार योजनाओं और KRCL की रेलवे परियोजना विकास, निर्माण एवं संचालन में विशेषज्ञता को एक साथ लाएगी।
समझौते के प्रमुख उद्देश्य
- कोयला निकासी क्षमता में वृद्धि
- आधुनिक रेल अवसंरचना का विकास
- लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार
- उत्पादन वृद्धि को समर्थन
- भविष्य की खदान परियोजनाओं के लिए कनेक्टिविटी तैयार करना
यह परियोजनाएं भारतीय रेलवे के Development Partner (DP) Model और Hybrid Annuity Model के तहत विकसित की जाएंगी।
इन प्रमुख रेल कॉरिडोरों का होगा विकास
समझौते के तहत कई महत्वपूर्ण रेल लाइनों की पहचान की गई है, जो SECL के कोयला क्षेत्रों को बेहतर रेल संपर्क प्रदान करेंगी।
प्रस्तावित रेल परियोजनाएं
1. दीपका–गटोरा रेल लाइन
- लंबाई: लगभग 52 किलोमीटर
- उद्देश्य: कोयला निकासी क्षमता बढ़ाना
2. करोंजी–मदन नगर रेल कॉरिडोर
- लंबाई: लगभग 37 किलोमीटर
- भविष्य में बिश्रामपुर तक विस्तार की संभावना
3. अमलाई–रामपुर बटुरा रेल लाइन
- लंबाई: लगभग 14 किलोमीटर
- क्षेत्रीय परिवहन नेटवर्क को मजबूती
ग्रीनफील्ड और मौजूदा कोल ब्लॉकों को भी मिलेगा लाभ
South Eastern Coalfields Limited और Konkan Railway Corporation Limited भविष्य के ग्रीनफील्ड और वर्तमान कोल ब्लॉकों के लिए भी रेल कनेक्टिविटी समाधान तलाशेंगे।
इससे:
- कोयला परिवहन अधिक कुशल होगा
- सड़क परिवहन पर निर्भरता घटेगी
- पर्यावरणीय प्रभाव कम होगा
- लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी
ऊर्जा सुरक्षा और बिजली उत्पादन को मिलेगा फायदा
नई रेल परियोजनाओं के पूरा होने के बाद देशभर के ताप विद्युत संयंत्रों और औद्योगिक इकाइयों तक कोयले की आपूर्ति अधिक सुगम और तेज हो सकेगी।
संभावित लाभ
- कोयला आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी
- परिवहन बाधाओं में कमी
- बिजली संयंत्रों को समय पर कोयला उपलब्धता
- ऊर्जा क्षेत्र की विश्वसनीयता में सुधार
आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में बढ़ेगी कनेक्टिविटी
इन रेल कॉरिडोरों का लाभ केवल कोयला परिवहन तक सीमित नहीं रहेगा।
क्षेत्रीय विकास को मिलेगा बढ़ावा
- दूरस्थ एवं आदिवासी क्षेत्रों में बेहतर संपर्क
- स्थानीय रोजगार के अवसर
- आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि
- भविष्य में यात्री रेल सेवाओं की संभावना
रेलवे मंत्रालय के साथ मिलकर होगा क्रियान्वयन
समझौते के तहत दोनों संस्थाएं Ministry of Railways तथा अन्य संबंधित हितधारकों के साथ समन्वय स्थापित कर परियोजनाओं के क्रियान्वयन को गति देंगी।
साथ ही, संयुक्त उद्यम (JV) और कंसोर्टियम मॉडल जैसे दीर्घकालिक सहयोग विकल्पों पर भी विचार किया जाएगा।
वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ समझौता
इस अवसर पर कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रमुख अधिकारी
- हरीश दुहन – अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक, SECL
- सुनील गुप्ता – निदेशक (ऑपरेशन एवं कमर्शियल)
- एन फ्रैंकलिन जयकुमार – निदेशक (तकनीकी-ऑपरेशन)
- डी सुनील कुमार – निदेशक (वित्त)
- अशोक कुमार पटनायक – महाप्रबंधक (साइडिंग)
SECL की दीर्घकालिक विकास रणनीति का अहम हिस्सा
भारत की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में कोयले की महत्वपूर्ण भूमिका बनी हुई है। ऐसे में आधुनिक कोयला निकासी अवसंरचना का विकास SECL की दीर्घकालिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
यह साझेदारी न केवल उत्पादन क्षमता को समर्थन देगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास और देश की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत बनाएगी।
