Power Grid Corporation of India Limited (पावरग्रिड) को “WR-ER Inter-Regional Network Expansion Scheme Part-A” परियोजना के विकास का अधिकार प्राप्त हुआ है। कंपनी को इस परियोजना के लिए 16 जून 2026 को लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) प्राप्त हुआ। यह परियोजना टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली (TBCB) प्रक्रिया के तहत प्रदान की गई है।
यह उपलब्धि पावरग्रिड की देशव्यापी ट्रांसमिशन अवसंरचना विस्तार रणनीति को और मजबूती प्रदान करेगी तथा कंपनी के लिए दीर्घकालिक राजस्व सृजन के नए अवसर उत्पन्न करेगी।
क्या है परियोजना का दायरा?
इस परियोजना के अंतर्गत पश्चिमी (Western Region) और पूर्वी (Eastern Region) ग्रिडों के बीच विद्युत संपर्क क्षमता को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण ट्रांसमिशन परिसंपत्तियों का निर्माण किया जाएगा।
परियोजना में शामिल प्रमुख कार्य:
- झारखंड और छत्तीसगढ़ में नए 765/400 केवी सब-स्टेशन की स्थापना
- छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल में मौजूदा सब-स्टेशनों का विस्तार
- झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में नई 765 केवी एवं 400 केवी ट्रांसमिशन लाइनों का निर्माण
- अंतर-क्षेत्रीय विद्युत हस्तांतरण क्षमता को मजबूत करना
इस परियोजना से देश के विभिन्न क्षेत्रों के बीच बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता और ग्रिड स्थिरता में सुधार होने की उम्मीद है।
BOOT मॉडल से मिलेगा स्थिर राजस्व
यह परियोजना Build, Own, Operate and Transfer (BOOT) मॉडल के तहत विकसित की जाएगी।
इस मॉडल में डेवलपर:
- परियोजना का निर्माण करता है,
- उसका स्वामित्व रखता है,
- निर्धारित अवधि तक उसका संचालन करता है,
- और बाद में परिसंपत्ति का हस्तांतरण करता है।
इस प्रकार की परियोजनाएं आमतौर पर लंबी अवधि तक स्थिर और अनुमानित राजस्व (Annuity-like Revenue) उपलब्ध कराती हैं, जो पावरग्रिड जैसे पूंजी-गहन व्यवसायों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
पावरग्रिड की विस्तार रणनीति को मिला बल
पावरग्रिड लगातार देशभर में ट्रांसमिशन नेटवर्क विस्तार और इंटर-रीजनल कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रियाओं में भाग ले रही है। यह नई परियोजना कंपनी की राष्ट्रीय ग्रिड को सुदृढ़ बनाने की रणनीति का हिस्सा है।
ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती बिजली मांग, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार और राष्ट्रीय ग्रिड एकीकरण की आवश्यकता को देखते हुए ऐसे ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स का महत्व लगातार बढ़ रहा है।
निवेशकों के लिए क्या है महत्व?
यह परियोजना निवेशकों के लिए कई कारणों से सकारात्मक मानी जा रही है:
- दीर्घकालिक राजस्व दृश्यता (Revenue Visibility)
- ट्रांसमिशन परिसंपत्तियों में वृद्धि
- विनियमित आय (Regulated Revenue) का विस्तार
- भविष्य के नकदी प्रवाह को मजबूती
- राष्ट्रीय ग्रिड विस्तार में बढ़ती भागीदारी
हालांकि परियोजना के निष्पादन के दौरान पूंजीगत व्यय (Capex), समयबद्ध निर्माण और नियामकीय स्वीकृतियां महत्वपूर्ण कारक रहेंगी।
किन जोखिमों पर रखनी होगी नजर?
बड़े अवसंरचना परियोजनाओं की तरह इस परियोजना में भी कुछ प्रमुख जोखिम मौजूद हैं:
- निर्माण कार्य में देरी
- लागत में वृद्धि (Cost Overrun)
- भूमि एवं स्वीकृतियों से जुड़ी चुनौतियां
- नियामकीय अनुमोदनों में विलंब
इन कारकों का प्रभाव परियोजना की अनुमानित रिटर्न प्रोफाइल पर पड़ सकता है।
आगे क्या देखें?
निवेशकों और उद्योग विशेषज्ञों की नजर अब निम्नलिखित पहलुओं पर रहेगी:
- परियोजना के लिए घोषित पूंजीगत व्यय
- निर्माण कार्य की प्रगति
- कमीशनिंग समय-सीमा
- परियोजना से उत्पन्न होने वाली नियामित आय
- पावरग्रिड की भविष्य की TBCB परियोजनाओं में सफलता
