पावर प्लांट्स में कोयले की कमी नहीं, किशन रेड्डी बोले- रेल और सड़क से जारी है सप्लाई

नई दिल्ली: देश के पावर प्लांट्स में कोयले की कमी की खबरों के बीच केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा है कि देश में कोयले की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि थर्मल पावर की बढ़ती मांग और मानसून के कारण कुछ जगहों पर खनन गतिविधियों में आई अस्थायी रुकावट के बावजूद बिजली संयंत्रों तक कोयले की आपूर्ति जारी है।

असोचैम द्वारा आयोजित Angul Aluminium Roadshow के दौरान पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि पावर प्लांट्स को कोयला रेल रेक और सड़क परिवहन, दोनों माध्यमों से भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को कोयले की कमी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

थर्मल पावर की मांग 12–15% बढ़ी

किशन रेड्डी के मुताबिक देश में थर्मल पावर की मांग में करीब 12–15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसके पीछे प्रमुख कारण हाइड्रो पावर उत्पादन में कमी बताया गया है। ऐसे में बिजली की मांग पूरी करने के लिए थर्मल पावर पर निर्भरता बढ़ी है।

दूसरी ओर, मानसून के दौरान कुछ क्षेत्रों में कोयला खनन और परिवहन गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। हालांकि, मंत्री ने इसे अस्थायी परिचालन चुनौती बताते हुए कहा कि इससे देश में कोयले की व्यापक कमी की स्थिति पैदा नहीं हुई है।

उन्होंने मौजूदा स्थिति को सामान्य बताते हुए कहा कि कोई तनाव की स्थिति नहीं है।

रेल के साथ सड़क परिवहन पर भी जोर

सरकार पावर सेक्टर तक कोयले की आपूर्ति बनाए रखने के लिए रेल और सड़क परिवहन के संयोजन का इस्तेमाल कर रही है। जहां रेल रेक की उपलब्धता या रूट संबंधी बाधाओं के कारण तत्काल आपूर्ति प्रभावित होती है, वहां सड़क मार्ग से अतिरिक्त कोयला भेजने की व्यवस्था की जा सकती है।

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कोयला आपूर्ति की निगरानी में कोयला मंत्रालय, बिजली मंत्रालय, रेल मंत्रालय और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के बीच समन्वय महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पावर प्लांट्स के कोयला स्टॉक और डिस्पैच की नियमित समीक्षा की जाती है।

कोल इंडिया के कामकाज की होगी समीक्षा

किशन रेड्डी जल्द ही Coal India Limited (CIL) और उसकी सहायक कंपनियों के कामकाज की समीक्षा भी करेंगे। इस दौरान परियोजनाओं की प्रगति, उत्पादन और पावर सेक्टर को कोयला आपूर्ति सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

सरकार कोयला खनन में तकनीक के इस्तेमाल को भी बढ़ावा दे रही है। कोल इंडिया में IoT, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस, ऑटोमेटेड डिस्पैच सिस्टम और स्मार्ट कंट्रोल रूम जैसी तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है।

मार्च 2026 में 123.2 MT कोयला स्टॉक

सरकार द्वारा मार्च 2026 में संसद में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, 12 मार्च 2026 तक कोल इंडिया के माइन एंड पर करीब 123.2 मिलियन टन कोयला उपलब्ध था, जबकि करीब 3.9 मिलियन टन कोयला ट्रांजिट में था।

वहीं, वित्त वर्ष 2024-25 में घरेलू कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को लगभग 840 MT कोयला प्राप्त हुआ था, जबकि खपत करीब 832 MT रही थी। 31 मार्च 2025 को ऐसे पावर प्लांट्स में कोयला स्टॉक लगभग 55.5 MT बताया गया था।

फिलहाल सरकार का कहना है कि थर्मल पावर की बढ़ती मांग और मानसून से जुड़ी अस्थायी चुनौतियों के बावजूद पावर प्लांट्स तक कोयले की आपूर्ति बनाए रखने के लिए रेल, सड़क और अन्य लॉजिस्टिक माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है।