(विनीत खरे)
कोलकाता: कोलकाता स्थित Coal India Limited (CIL) के Corporate Office में हाल ही में “सत्यनिष्ठा के स्वर” नाम से कवि सम्मेलन हुआ। कार्यक्रम का आयोजन हिंदी माह, निवारक सतर्कता अभियान और सतर्कता जागरूकता सप्ताह की तैयारियों के तहत किया गया था। इसमें CIL Chairman बी. साईराम, Chief Vigilance Officer ब्रजेश कुमार त्रिपाठी सहित वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। कविता, सत्यनिष्ठा, सतर्कता और भाषा प्रेम से जुड़े संदेशों ने कार्यक्रम को एक सांस्कृतिक और नैतिक आयाम दिया।
साहित्य, भाषा और नैतिक मूल्यों के लिए समय निकालने में अपने आप में कोई समस्या नहीं है।

लेकिन सवाल कार्यक्रम का नहीं, समय और प्राथमिकताओं का है।
जब देश के thermal power plants में coal stock लगातार दबाव में हो, तब देश की सबसे बड़ी coal-producing company के शीर्ष प्रबंधन की प्राथमिकताओं पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
Thermal power plants में घटता coal stock क्या कह रहा है?
सितंबर के मध्य तक स्थिति गंभीर रूप ले चुकी थी। CEA के आंकड़ों पर आधारित रिपोर्ट के अनुसार 19 सितंबर 2026 को देश के 190 monitored thermal power plants में coal stock करीब 22.9 million tonnes रह गया था, जो केवल लगभग 7 दिनों का fuel cover देता था। इनमें 74 plants critical stock की स्थिति में थे। यह अगस्त के 51 critical plants से भी अधिक था।
इससे पहले Crisil Intelligence ने अगस्त में thermal power plants का coal inventory करीब 29 million tonnes बताया था, जो एक साल पहले के 50 million tonnes की तुलना में लगभग 42 प्रतिशत कम था। उस समय stock cover घटकर नौ दिन रह गया था। Crisil ने बढ़ी बिजली मांग, thermal generation में वृद्धि और supply logistics को inventory pressure के प्रमुख कारणों में गिना था।
यानी समस्या अचानक पैदा हुई कोई एक-दिन की घटना नहीं है। यह कई सप्ताह से बन रहा दबाव है।
और जब 74 thermal plants critical stock की स्थिति में पहुंच चुके हों, तो सवाल केवल आंकड़ों का नहीं रह जाता। यह energy security, generation reliability और coal logistics का सवाल बन जाता है।
और इसी बीच CIL का अपना production target…
Coal India के आधिकारिक production dashboard के अनुसार 17 सितंबर 2026 तक CIL का production 297.07 million tonnes था, जबकि इसी अवधि का YTD target 325.84 million tonnes था। यानी कंपनी अपने YTD production target से करीब 28.77 million tonnes पीछे थी और achievement 91.17 प्रतिशत रही।
यहां एक जरूरी बात समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
Thermal power plants में कम stock का पूरा कारण केवल Coal India के production performance को मान लेना सही नहीं होगा। Crisil और अन्य रिपोर्टों ने high power demand तथा transportation/logistics constraints को भी महत्वपूर्ण कारण बताया है।
लेकिन यही तो वह बिंदु है जहां Coal India के शीर्ष प्रबंधन की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है।
जब उत्पादन, dispatch, railway availability, mine-to-plant movement और plant-wise prioritisation—इन सभी मोर्चों पर दबाव हो, तब management attention का बड़ा हिस्सा इन bottlenecks को दूर करने में होना चाहिए।

“सत्यनिष्ठा” की असली परीक्षा क्या है?
विडंबना यह है कि जिस कार्यक्रम का नाम “सत्यनिष्ठा के स्वर” था, उसी समय coal supply chain के सामने एक अलग तरह की परीक्षा खड़ी है।
सत्यनिष्ठा केवल भाषणों, कविताओं या vigilance campaigns में दिखाई देने वाली अवधारणा नहीं हो सकती। किसी सार्वजनिक उपक्रम के संदर्भ में इसका एक व्यावहारिक अर्थ यह भी है कि संस्था अपने core mandate और सार्वजनिक दायित्वों के प्रति कितनी जवाबदेह है।
Coal India का मूल mandate coal production और उसके supply ecosystem में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना है।
इसलिए जब power plants में coal stock घटता है, तो असली सवाल यह होना चाहिए:
कौन-सी mine से कितना अतिरिक्त coal निकाला जा सकता है?
किस thermal plant को तत्काल priority dispatch चाहिए?
कहां railway rake की कमी है?
कहां बारिश या logistics के कारण evacuation प्रभावित हुआ है?
किन plants को alternative sourcing या अतिरिक्त movement की जरूरत है?
और सबसे महत्वपूर्ण—
क्या अगले कुछ दिनों में critical plants का stock सुरक्षित स्तर तक पहुंचाया जा सकता है?
यही वे सवाल हैं जिनका जवाब देश का power sector चाहता है।
कविता गलत नहीं, लेकिन प्राथमिकता जरूरी है
यह कहना गलत होगा कि Coal India के अधिकारियों को किसी cultural या vigilance कार्यक्रम में शामिल नहीं होना चाहिए।
संगठनों में employee engagement, हिंदी, साहित्य और integrity campaigns की अपनी जगह है। बल्कि ethical conduct और transparency किसी भी public sector organisation के लिए महत्वपूर्ण हैं।
लेकिन governance का मतलब यही है कि हर समय प्राथमिकता तय की जाए।
जब operational environment सामान्य हो, तब एक कविता सम्मेलन organisational culture का हिस्सा हो सकता है।
लेकिन जब thermal power stations का aggregate coal cover करीब एक सप्ताह के आसपास पहुंच जाए और दर्जनों plants critical category में हों, तब senior management का सबसे बड़ा focus production, dispatch और supply-chain execution पर होना चाहिए।
क्योंकि power plant में कविता की पंक्तियां generation नहीं बढ़ातीं।
Coal करती है।
और coal mine से power plant तक समय पर पहुंचने वाला coal ही बिजली व्यवस्था को चलाता है।
सवाल कार्यक्रम पर नहीं, जवाबदेही पर है
Coal India के सामने इस समय चुनौती केवल अधिक coal निकालने की नहीं है। उसे यह भी सुनिश्चित करना है कि उपलब्ध coal सही समय पर सही power plant तक पहुंचे।
CEA से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि सितंबर में स्थिति तेजी से कमजोर हुई है। 19 सितंबर तक 190 monitored plants में 74 critical stock की स्थिति में थे।
इसी बीच 23 सितंबर की रिपोर्टों में कुछ thermal plants के पास पांच दिन से भी कम stock होने और Coal India की subsidiaries द्वारा supply बढ़ाने तथा अतिरिक्त railway rakes की व्यवस्था किए जाने की जानकारी सामने आई।
इसका मतलब है कि समस्या केवल कागज पर नहीं है। Ground-level logistics भी दबाव में है।
ऐसे समय में CIL management से यह पूछना किसी cultural event की आलोचना नहीं, बल्कि public accountability का सवाल है:
क्या senior management का पर्याप्त ध्यान उन power plants पर है जिनके पास केवल कुछ दिनों का coal बचा है?
क्या production shortfall को तेजी से पाटने की स्पष्ट रणनीति है?
क्या dispatch और railway logistics की daily monitoring को सर्वोच्च operational priority बनाया गया है?
और क्या इन सवालों के जवाब जनता और power sector के साथ स्पष्ट रूप से साझा किए जा रहे हैं?
असली “सत्यनिष्ठा” शायद यहीं है
सतर्कता का अर्थ केवल यह सुनिश्चित करना नहीं कि कोई नियम न टूटे।
सतर्कता का अर्थ यह भी है कि संकट आने से पहले उसे पहचाना जाए।
सत्यनिष्ठा का अर्थ केवल ईमानदारी पर कविता लिखना नहीं है।
सत्यनिष्ठा का अर्थ यह भी है कि performance gap को स्वीकार किया जाए और उसे दूर करने की जिम्मेदारी तय की जाए।
और सार्वजनिक क्षेत्र की जवाबदेही का अर्थ केवल आयोजन करना नहीं है।
जवाबदेही का अर्थ है—जब देश को coal चाहिए, तब coal उपलब्ध कराना।
कवि सम्मेलन होते रहेंगे। कविताएं भी लिखी जाएंगी। हिंदी और साहित्य को भी सम्मान मिलता रहना चाहिए।
लेकिन thermal power plant की furnace को कविता नहीं, कोयला चाहिए।
इसलिए आज Coal India के Corporate Office में गूंजे “सत्यनिष्ठा के स्वर” के साथ एक और आवाज सुनाई देनी चाहिए—
“कोयला कब पहुंचेगा?”
यही वह सवाल है, जिसका जवाब इस समय कविता से नहीं, production, dispatch और delivery के आंकड़ों से देना होगा।